मृदपिचचन्दनम्| MRIDAPI CHA CHANDANAM |संस्कृतगीत

1
563

मृदपिमृदपिचचन्दनमस्मिन्देशेग्रामोग्राम:सिद्धवनम्。
यत्रचबालाद​​ेवीरूपाबाला:सर्वेश्रीरामा:。

हरिमन्दिरमिदमखिलशरीरम्
धनशक्तीजनसेवायै
यत्रयत्रचक्रीडायै:
धेनुर्मातापरमशिवा。

नित्यंप्रात:शिवगुणगानं
दीपनुति:खलुशत्रुपरा。 。 मृदपि。

भाग्यविधायिनिजार्जितकर्म
यत्रयत्र:श्रियमर्जयति。
त्यागधनानांतपोनिधीनां
गाथांगायतिकविवाणी

गंगाजलमिवनित्यनिर्मलं
ज्ञानंज्ञानंयतिवाणी。 。 मृदपि。

यत्रयत्रहिनैव:
युद्धरतानांवीराणाम्。
यत्रहिकृषक:कार्यरत:सन्
पश्यतिजीवनसाफल्यम्

जीवनलक्ष्यंनहिधनपदवी
यत्रयत्रपरशिवपदसेवा。 。 मृदपि。

- श्रीजर्नादनहेगडे


यहभीपढ़ें


1条评论

发表评论

请输入您的评论!
请在这里输入您的姓名